मद्रास हाईकोर्ट ने सारी गृहणियों के पक्ष में एक फैसले के दौरान काफी महत्वपूर्ण टिप्पड़ी की है। कोर्ट के मुताबिक, एक महिला हर रोजा बिना तनख्वाह घर की देखरेख करती है।
कोर्ट ने कहा कि इसलिए किसी भी ऐसी महिला को होममेकर (गृहिणी) और बिना इनकम वाली कहना गलत है। कोर्ट ने कहा महिला सिर्फ एक मां और पत्नी नहीं होती है, बल्कि वो अपने परिवार की वित्त मंत्री और चार्टर्ड अकाउंटेंट भी होती है।
मद्रास हाईकोर्ट ने ये कमेंट कोर्टपुडुचेरी बिजली बोर्ड की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान किया। असल में, बोर्ड को बिजली लगने से हुई एक महिला की मौत के बाद उसके पति को 4 लाख रुपए बतौर मुआवजा देना था।
जिस पर बिजली बोर्ड ने तर्क पेश करते हुए कहा कि वह सिर्फ एक होममेकर थी और उसकी कोई तनख्वाह भी नहीं थी।
मद्रास हाईकोर्ट की शशिधरन और जस्टिस एम मुरलीधरन की डिवीजन बेंच ने बुधवार को इस केस की सुनवाई के दौरान कहा, ‘वह एक कर्त्तव्यनिष्ठ पत्नी और दो बच्चों को प्यार करने वाली मां थी। वह परिवार की वित्त मंत्री, शेफ, चार्टर्ड अकाउंटेंट भी थी।’
कोर्ट ने कहा, ‘वह घर की आमदनी और खर्च का ख्याल रखती थी। उसके पति ने पत्नी और बच्चों ने मां को खो दिया। उसकी मौत से पति उसकी देखरेख से भी महरूम हो गया। हमें खाना पकाना, कपड़े धोना, सफाई करना जैसे रोजाना के कामों को अलग नजरिए से देखने की जरूरत है। पति साथी का प्यार और साथ खो चुका है, बच्चे मां को खो चुके हैं, ये सारी चीजें भी ध्यान में रखने की जरूरत है।’
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, ‘आम आदमी का इलेक्ट्रिकल सिस्टम और ट्रांसमिशन लाइन पर कंट्रोल नहीं होता है। अगर हादसा होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग की होती है। विभाग से इस मामले में और ज्यादा सावधानी बरतने की उम्मीद की जाती है।’
इसके साथ ही मद्रास हाईकोर्ट ने बिजली बोर्ड से मृतक महिला के पति को 9% ब्याज के साथ मुआवजे की पूरी राशि अदा करने का फैसला सुनाया है।
उल्लेखनीय है कि पुडुचेरी की मालती की 17 मई 2009 की मौत खेत में बिजली के खुले तार जहां वह बिजली के तारकी चपेट में आ जाने से हुई थी। जिसके बाद उसके पति संभत कुमार ने कोर्ट में अपनी पत्नी की मौत के लिए बिजली बोर्ड को जिम्मेदार ठहराते हुए 5 लाख रुपए मुआवजे की मांग की थी।
औरत केवल मां-पत्नी नहीं है, परिवार की वित्त मंत्री भी: मद्रास HC
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